YouTube, Facebook, Instagram, X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बड़ा झटका दिया है। सोशल प्लेटफॉर्म्स को केंद्रीय मंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स के साथ रेवेन्यू शेयर करने की सलाह दी है। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉनक्लेव को संबोधित करते हुए IT मिनिस्टर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल को बदलने के लिए कहा है। साथ ही, केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वो रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल लेकर नहीं आती हैं, तो सरकार इसके लिए अलग से कानूनी प्रस्ताव लेकर आएगी।
केंद्रीय मंत्री ने कॉनक्लेव में बोलते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपने रेवेन्यू मॉडल में बदलाव करने की जरूरत है। इन प्लेटफॉर्म्स पर अपने कॉन्टेट शेयर करने वाले क्रिएटर्स के साथ उन्हें अपना रेवेन्यू शेयर करना होगा। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ये कॉन्टेंट क्रिएटर्स किसी भी फील्ड के हो सकते हैं, जिनमें न्यूज कॉन्टेंट क्रिएटर्स, ट्रेडिशन मीडिया हाउस या फिर दूर-दराज गांव से कॉन्टेंट शेयर करने वाले क्रिएटर्स ही क्यों न हो, उन्हें अपने कॉन्टेंट का मेहनताना मिलना चाहिए।
अपने संबोधन में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अगर सोशल मीडिया कंपनियां अपने रेवेन्यू मॉडल में बदलाव नहीं करती हैं तो सरकार को इसके लिए कानूनी रास्ता अपनाना होगा और इसे लीगल बनाना होगा। बता दें ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों में भी सोशल मीडिया कंपनियों के रेवेन्यू शेयरिंग को लेकर सख्ती की जा रही है। सोशल मीडिया के बढ़ते दौर में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए भारत में भी रेवेन्यू शेयरिंग पर जोर दिया जाएगा।
सरकार के निर्देश पर अगर सोशल मीडिया कंपनियां अलग रेवेन्यू मॉडल लेकर आती हैं, तो इसका सीधा फायदा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट शेयर करने वाले क्रिएटर्स को मिलेगा। खास तौर पर ओरिजिनल कंटेंट शेयर करने वाले क्रिएटर्स को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है।
इस कॉनक्लेव में केंद्रीय मंत्री ने AI रेगुलेशन पर बोलते हुए कहा कि इंटरनेट का स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। एआई से बनाए गए कंटेंट के उपयोग को रेगुलेट करने की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि ऐसी सामग्री का निर्माण उस व्यक्ति की सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए जिसका चेहरा, आवाज या व्यक्तित्व इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "अब समय आ गया है कि हम यह बड़ा बदलाव लाएं। मैं मंचों से अनुरोध करता हूं कि वे इस मानव समाज की मूलभूत आवश्यकताओं में सहयोग करें। आज जो समाज इस बदलाव की मांग कर रहा है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।"
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